बांस को जलाने से वंश वृद्धि बाधित अस्थमा,कैंसर,सरदर्द …

काली तंत्र..
बांस को जलाने से वंश वृद्धि बाधित, अस्थमा,कैंसर,सरदर्द एवं खांसी संभावित और ईश्वर भी अप्रसन्न

बांस को जलाने से वंश वृद्धि बाधित अस्थमा कैंसर सर दर्द एवं खांसी संभावित और ईश्वर भी अप्रशन |भारत में पाए जाने वाली अत्यंत उपयोगी घास बांस है |  पुष्पक आवृत्ति बीच एक पत्री बीच कुल का पादप है|  इसका अन्य महत्वपूर्ण सदस्य डूब, गेहूं, मक्का ,जोड़ ,धान है •भारत में बांस के कुल जंगल का क्षेत्रफल एक 1.4 मिलियन हेक्टर जो जंगलों का 13 प्रतिशत है भारत में बांस के लगभग 24 वंश पाए जाते हैं | एवं विश्व में 70 से अधिक वंश पाए जाते हैं |एवं विश्व में 70 से अधिक  बांस के 1000 से अधिक प्रजातियां है| यह पृथ्वी पर सबसे तेज बढ़ने वाला राष्ट्रीय पौधा है| इसके कुछ प्रजातियां एक दिन मैं 121 सेंटीमीटर चार 7.6 इंच तक बढ़ जाती है |थोड़े समय के लिए ही सही पर कभी-कभी इसके बढ़ने की रफ्तार 1 मीटर 39 मीटर प्रति घंटा तक पहुंच जाती है बांस का तना लंबा पर्व संधि युक्त खोखला एवं शाखा अमृत होता है | तने को  संधि स्तंभ कहते हैं|  बांस की पर्व संध्या ठोस एवं खोखली एवं पत्तियों का शीर्ष भाग वाले के समान नुकीले होते हैं | बांस परिस्थितियों में के अनुकूल  एवं प्राकृतिक निर्माण पदार्थ होने से बेहतर क्षमता एवं निर्माण गुण रखता है | बांस का सबसे उपयोगी भाग है तने ,की मजबूती उससे कथित सिलिका तथा उनकी मोटाई पर निर्भर है|  (यह पौधा अपने जीवन में एक बार ही सफेद फूल और फल धारण करता है )इसका बीज साधारणतया घास के बीज के समान होता है|  साधारणतया  सुख एवं गर्म हवा सूखे की स्थिति में ही जब खेती मारी जाती है| और दुर्भिक्ष पड़ता है तभी बांस पत्तियों के स्थान पर कलियां खिलती है |फूल खिलते ही पत्तियां झड़ जाती है, और बांस का जीवन समाप्त हो जाता है| मिट्टी में आने के प्रथम सप्ताह में ही बीज उगना आरंभ कर देता है, बीजू सेवा धीरे-धीरे उठता है कुछ बसों में वृक्ष पर दो अंकुर निकलते हैं|

 बांस का जीवन 1 से 50 वर्ष तक होता है प्रत्येक वास 4 से 20 साल तक जो या चावल के समान फल होता है जो चावल की अपेक्षा सस्ते बिकते हैं|  या भोजन का भी स्त्रोत है बांस के एक सौ ग्राम बीच में 60.36 ग्राम कार्बोहाइड्रेट और 265 पॉइंट 6 कैलरी ऊर्जा रहती है| बांस के बीच से अधिक कार्बोहाइड्रेट और अधिक ऊर्जा देने वाला स्वास्थ्यवर्धक पदार्थ कोई और नहीं है | बांस में पानी में बहुत दिन तक बांस खराब नहीं होते और कीड़ों के कारण  नष्ट होने की संभावना रहती है| भारत में भाषा के पांच प्रकार पाए जाते हैं 1.विदुर बास 2.कांटेदार बास 3.एक आवास पीली हरी 4.धारीवाल आवास शिवालिका 5.पर्वतीय बांस | बांस का उपयोग= बांस का आर्थिक एवं सांस्कृतिक महत्व है बांस की प्राकृतिक सुंदरता के कारण दुनिया में इसकी मांग सुंदर एवं डिजाइन तेजी से बढ़ रही है|  इसका उपयोग घरेलू उपयोग की वस्तुएं चटाई या कुर्सी टेबल चारपाई एवं साज-सज्जा के समान, फसल ,वास्तुकला, भंडारण ,संरचनाओं ,आवास मत्स्य पालन संरचनाएं, मछली जाल ,मछली बीजों, का परिवहन पुल बांधने इत्यादि में किया जाता है | चिकित्सीय उपकरण के अभाव में बांस के तनो एवं पत्तियों को काट छांट कर सफाई करके अंखियों का उपयोग किया जाता है | खोकला तना अपंग लोगों का सहारा है |और इससे खेती का औजार उन तथा सूत्र काटने की कलीफ ही बनाई जाती है |नागा लोगों में पूजा के अवसर पर इसी का बर्तन उपयोग में लेते हैं |पुराने समय में बास तीर धनुष वाले आदि लड़ाई के समान तैयार किए जाते हैं एवं किलो की रक्षा बास्की कांटेदार झाड़ियों से की जाती है |इस तरह तरह के बाजे जैसे बांसुरी वाइल अनादि बनाया जाता है |बांस की नई शाखाएं में राष्ट्र एकत्रित होने पर वंशलोचन बनता है| और तभी से सुगंध निकलती है बांस का अचार मुरब्बा भी बनता है |जानवरों का बच्चा होने के बाद पेट की सफाई के लिए छोटी-छोटी टहनियों पत्तियों को उबालकर दिया जाता है |

हिंदू समाज में बास की लकड़ी मजबूत लचीली और हल्की होने के कारण पार्थिव शरीर को बांस की हरी लकड़ी का इस्तेमाल कर शमशान तक ले जा कर अंतिम संस्कार किया जाता है| शास्त्रों में बांस को जलाना वर्जित है धन के जानकार कहते हैं कि अगरबत्ती में बांस किसी के लगी होती है और बांस की लकड़ी का दुआ हमारी प्रजनन क्षमता को प्रभावित करता है |इसलिए बॉस को जलाने से कुलवंत जलता है इसलिए बांस को जलाना अर्थात अपना वंश चलाना अगरबत्ती जलाने से पितृदोष लगता है| बांस को जलाने से कुल के वंश में वृद्धि रुक जाती है| एवं ईश्वर भी प्रसन्न नहीं होते हिंदू धर्म में बेटी की विवाह में बांस का सम्मान दिया जाता है जिसका अर्थ है की बेटी जिस घर में जाए उसे घर का वर्ष बढ़ता रहे| वैज्ञानिक शोध में पता चला है कि बांस का पेड़ अन्य पेड़ों की अपेक्षा 30% अधिक ऑक्सीजन छोड़ता है और कार्बन डाइऑक्साइड खींचता है| साथिया पीपल की तरह दिन में कार्बन डाइऑक्साइड लेता है रात में ऑक्सीजन छोड़ता है अन्य तीव्र गति से बढ़ने वाले पेड़ों की तुलना में बांसवाड़ा से कई गुना ज्यादा कार्बन संरक्षित करता है| बांस एक हेक्टर क्षेत्र प्रतिवर्ष वातावरण से 17 टन कार्बन अवशोषित करता है |बांस की लकड़ी में लेड के साथ कई अन्य प्रकार के धातु होती है, ऐसे में लकड़ी जलाने से यह धातुएं अपनी ऑक्साइड बना लेते हैं|  जिससे वातावरण दूषित होकर जान भी ले सकता है | दूषित हवा के अंश सांस के द्वारा शरीर में प्रवेश कर न्यूरो और लीवर संबंधी परेशानियों का खतरा बढ़ बढ़ाते हैं |अगरबत्ती के धुएं में पाए जाने वाले पॉली एरोमेटिक हाइड्रोकार्बन से पूजा करने वाले को अस्थमा के अनुसार सर दर्द एवं खांसी ज्यादा पाई गई है| अगर आप नियमित पूजा में अगरबत्ती जलाते हैं तो अगर बच्चों की मात्रा कम कर दें, या फिर केवल घी का दीपक जलाएं अगरबत्ती को घर जलाने से कार्बन मोनोऑक्साइड फैलता है| बंद कमरे में अगरबत्ती जलाने से बढ़ जाती है और फेफड़ों पर ज्यादा असर करती है बांस की लकड़ी को जलाकर भोजन भी नहीं बनाना चाहिए गाय के गोबर में गूगल की चंदन कपूर आदि मिलाकर छोटी गोलियां बनाकर उन्हें जला शुरू करें इससे वातावरण शुद्ध होता है|

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