Mastic ka magic

{मानव मस्तिष्क की रोचक कहानी} ं••••••••••••••••••हमें लगता है कि  मस्तिष्क अपेक्षाकृत ठोश होती है किंतु ऐसा नहीं है •••••••••मस्तिष्क में 80% पानी होता है मस्तिष्क दिन की अपेक्षा रात्रि को अधिक सक्रिय रहता है|

 दिन भर हमारा शरीर सक्रिय रहता है रात को सो जाने पर वह विश्राम की अवस्था में रहता है हम समझते हैं कि मस्तिष्क दिन में रात्रि की अपेक्षा अधिक सक्रिय रहता होगा जबकि वास्तविकता यह है कि मस्तिष्क दिन की अपेक्षा रात्रि में अधिक सक्रिय रहता है | मस्तिष्क को कार्य करने के लिए मात्र 10 वाट विद्युत शक्ति की आवश्यकता होती है, जटिल से जटिल कार्य करने के लिए भी मस्तिष्क को 10 वाट विद्युत शक्ति की आवश्यकता होती है| अधिक  IQ वाले व्यक्ति को सपने भी अधिक दिखाई देते हैं आप के iq जितना अधिक होगा आप जितने अधिक कुशाग्र बुद्धि के स्वामी होंगे |उतने ही अधिक सपने दिखाई देंगे यह अलग है कि तरुणा अवस्था में मस्तिष्क का आकार बदल जाता है| •••••• तरुण अवस्था में सर्वाधिक कल्पनाशील और संयुक्त होता है| और यही वह अवस्था है कि जब मस्तिष्क का आकार भी बदल जाता है |यहां तक कि इस अवस्था में यह जोखिम भरे कार्य करने पर भी उतारू हो जाते हैं मस्तिष्क में प्रत्येक वस्तु  संग्रह हो जाते हैं कुछ भी नहीं छूटता या अलग बात है कि मनुष्य मस्तिष्क में सूचनाओं तक वापस पहुंचने की अनेक घटनाओं को स्मरण करने की क्षमता नहीं है |•••••••••मस्तिष्क को दर्द का अनुभव नहीं होता |••••••••मस्तिष्क ही दर्द के संकेत को समझकर शरीर के अन्य भागों को पीड़ा का अनुभव कराता है| किंतु चमत्कारिक बात यह है कि वह स्वयं कभी पीड़ा का अनुभव नहीं करता|•••••••••• मस्तिष्क को ऑक्सीजन की सबसे अधिक आवश्यकता होती है यदि मस्तिष्क का भार शरीर के भार से लगभग2%  होता है |  सांस के द्वारा खींचे ऑक्सीजन का 20% हिस्सा  मस्तिष्क के प्रयोग में आता है|

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